नई दिल्ली: अल नीनो की संभावित मजबूत स्थिति के बीच भारत में मानसून के पहले तीन महीने करीब-करीब सामान्य रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 30 अगस्त के बीच देश में सामान्य 694 मिलीमीटर के मुकाबले 598 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य से 14 फीसदी कम है। हालांकि, 20 फीसदी से कम कमी को मौसम विभाग सामान्य बारिश की श्रेणी में रखता है। इसके बावजूद देश के 44 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है।
देश के 56 फीसदी भूभाग में अब तक सामान्य बारिश हुई है, जबकि 44 फीसदी क्षेत्र में बारिश कम रही है। चार प्रमुख क्षेत्रों में पूर्वोत्तर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं मध्य भारत में बारिश की स्थिति बेहतर रही है।
पूर्वोत्तर में 26 फीसदी कम बारिश, फिर भी हालात बहुत खराब नहीं
पूर्वोत्तर भारत में 1 जून से 30 अगस्त के बीच सामान्य 1075 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 792 मिलीमीटर वर्षा हुई। यह सामान्य से 26 फीसदी कम है। हालांकि, इस क्षेत्र में सामान्य बारिश का स्तर देश के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी अधिक रहता है। इसलिए आंकड़ों में बड़ी कमी दिखाई देने के बावजूद जमीन पर बारिश की मात्रा कई दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा रही है।
इसी वजह से पूर्वोत्तर में बारिश की कमी का असर आंकड़ों में ज्यादा दिखाई देता है, जबकि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं मानी जा रही है।
उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश कम
उत्तर-पश्चिम भारत में भी मानसून सामान्य से पीछे रहा है। यहां अब तक 480 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले 429 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से 11 फीसदी कम है। इसके मुकाबले मध्य भारत में मानसून की स्थिति अच्छी रही है और यहां बारिश ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
क्या होता है अल नीनो और क्यों बढ़ती है भारत की चिंता?
अल नीनो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से बनने वाली जलवायु स्थिति है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ता है और भारत में इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
भारत के लिए अल नीनो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बारिश का बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करता है। हालांकि, हर बार अल नीनो आने पर भारत में मानसून खराब ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। वर्ष 2023 में भी अल नीनो की स्थिति बनी थी, लेकिन जून से सितंबर तक देश में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से सिर्फ 5.3 फीसदी कम रही थी।
इस बार क्यों बढ़ी हुई है चिंता?
इस साल मौसम विशेषज्ञों ने बेहद मजबूत अल नीनो की संभावना जताई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए के मुताबिक यह पिछले सात दशकों में सबसे ताकतवर अल नीनो हो सकता है। अनुमान है कि सितंबर तक सुपर अल नीनो का प्रभाव शुरू हो सकता है और साल के अंत तक इसकी तीव्रता चरम पर पहुंच सकती है।
ऐसे में मानसून के अब तक सामान्य रहने के बावजूद मौसम की आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। खासकर बारिश की क्षेत्रीय असमानता और अल नीनो की संभावित बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
